- पराली न जलाने की अपील, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर दिया जोर
होशियारपुर, 10 अक्तूबर:
डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन और मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. दविंदर सिंह के दिशा-निर्देशों तथा कृषि अधिकारी गढ़शंकर डॉ. सुखजिंदर सिंह के नेतृत्व में पराली प्रबंधन संबंधी किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. सुखजिंदर पाल ने किसानों को संबोधित करते हुए अपील की कि वे धान की पराली को न जलाएं, क्योंकि इससे वातावरण में जहरीली गैसें फैलती हैं जो मानव जीवन के लिए हानिकारक हैं और साथ ही मिट्टी की उर्वरता को भी कम करती हैं। उन्होंने बताया कि धान की फसल के माध्यम से मिट्टी से प्राप्त पोषक तत्वों में से 25 प्रतिशत नाइट्रोजन, 50
प्रतिशत गंधक और 75 प्रतिशत पोटाश पराली में ही होते हैं। प्रत्येक टन पराली में लगभग 4-5.5 किलो नाइट्रोजन, 2-2.5 किलो फास्फोरस, 15-25 किलो पोटाश, 25 किलो गंधक और 400 किलो जैविक कार्बन पाया जाता है। पराली को जलाने से ये सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं।
डॉ. जसविंदर कुमार, कृषि विकास अधिकारी ने किसानों को सरसों और गेहूं की फसल की बुआई संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सरसों की फसल के लिए किसान डीएपी की जगह सिंगल सुपर फास्फेट खाद का प्रयोग करें, क्योंकि तेल बीज फसलों को गंधक तत्व की अधिक आवश्यकता होती है, जो इस खाद से उपलब्ध होता है।
कृषि विज्ञान केंद्र बाहोवाल के उप निदेशक डॉ. मनिंदर सिंह बौंस ने केंद्र में उपलब्ध रबी फसलों के बीजों की जानकारी दी। वहीं डॉ. प्रभावजोत कौर और डॉ. कर्मवीर सिंह गरचा ने किसानों से प्राकृतिक खेती के लाभ साझा किए।
डॉ. मनप्रीत सिंह, कृषि विकास अधिकारी गढ़शंकर ने किसानों को रबी फसलों की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। इस मौके पर गढ़शंकर ब्लॉक के विभिन्न गांवों के पांच किसानों को पराली न जलाने और फसल अवशेष प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही अजय कुमार, सीएससी सेंटर भवानीपुर की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों की ई-केवाईसी भी की गई। कार्यक्रम में कुलविंदर सिंह सानी (बीटीएम), बहादर सिंह और हरप्रीत सिंह (कृषि उप निरीक्षक), बलराज सिंह, सतीश कुमार, मोहित कुमार (एटीएम), राजकुमार, सतपाल सहित अनेक किसान उपस्थित थे।
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें