शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025

आपदा राहत में सब्जियां उगाने वाले किसानों से भेदभाव ना करे सरकार : तीक्ष्ण सूद

 

कहा : सब्जियों की फसलों को हुए नुकसान के लिए 1 लाख रूपए प्रति एकड़ दिया जाए मुआबजा। 

 होशियारपुर( 10  अक्टूबर) पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता तीक्ष्ण सूद द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा हैं कि जब कभी भी भारी बरसात या बाढ़ के कारण किसानो की फसलों पर आपदा का प्रकोप होता हैं तो आम तौर पर देखा गया हैं कि गेहूँ व धान की फसलों को प्रमुख रख कर राहत के लिए मुआबजा तैह किया जाता हैं।  सरकार ने कई बार नरमे की फसल पर गुलाबी सुंडी के आक्रमण से हुए नुकसान का मुआबजा देने की बात भी करी हैं।  परन्तु बड़े आश्चर्य की बात हैं कि सब्जियां उगाने वाले जो किसान कुदरत की प्रकोपी का सबसे अधिक नुकसान उठाते हैं।  उन्हें राहत देने के बारे में आज तक सरकार ने सहानुभूति पूर्वक कभी नहीं सोचा। पंजाब में तथा विशेष तौर पर  दोआबा क्षेत्र में प्रमुखता से  किसान आलू , मटर, गाजर, मूली, शलगम, पालक, मेथी आदि सब्जियों की कशत करते हैं। इन सब्जियों को उगाने में बीज तथा खाद के 40-50 हजार रुपए प्रति एकड़ खर्चा होता हैं।  जमीन तैयार करने का खर्चा अलग आता हैं।  इस बार देर तक चली बरसात ने एक तो बिजाई को काफी बिलम्ब करवाया , परन्तु हाल ही में हुई बरसातों में बीजी जा चुकी सभी फसलों को नष्ट कर डाला , जिससे कई किसानों का एक लाख रुपए प्रति एकड़ लगा हुआ खर्चा डूब गया तथा वह  कर्जे के बोझ के तले दब चूकें  हैं।  उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को दूसरी फसलों की तरह सब्जियां बीजने वाले किसानो की फसलों के नुकसान की गिरदावरी करके उन्हें उचित मुआबजा देना चाहिए।  उन्होंने मांग की आलू  तथा अन्य सब्जियों की भारी बरसात से खराब हुई फसल बीजने वाले किसानों को कम से कम एक लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से  मुआबजा राहत के तौर पर दिया जाए ताकि वह फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सके।    

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