शास्त्र कहता है कि योग करो बीमारी नहीं आएगी-आचार्य चंद्र मोहन
होशियारपुर12अक्टूबर(। ) योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के
दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि ऋषियो
ने चार वर्ण और चार आश्रम बनाए थे। पहला आश्रम एक कली होता है जिसे खिलना है। अगर कली को ही मसल दिया जाए तो फिर वह फूल कैसे बनेगा। जो वर्ण
बनाए थे उनमें से भी कई अपनी मनमानी कर रहे हैं। हिंदू धर्म के लोगों का धर्म
परिवर्तन करवाया जा रहा है। धर्म की रक्षा के
लिए आगे आने वाले लोग भी कम हो रहे हैं। धर्म को खतरा अंदर से है बाहर से नहीं।
कोई कहता है शास्त्र पढ़ो ताकि हमें सही बातों का पता चले लेकिन पढ़ाने वाले ही कम
है। बहुत से लोग दुखी हैं कोई शरीर से कोई मन से। हम शास्त्रों की तरफ नहीं देखते
कि दुख कैसे दूर हों? अपनी मनमानी करते
हैं। शरीर दुखी होता है तो दवाइयो की तरफ जाते हैं। शास्त्र कहता है कि योग करो
बीमारी नहीं आएगी। जो योग करता है वह सुखी रहता है।औषधियाँ तो आपातकाल के लिए होते
हैं, नित्य खाने के लिए नहीं। शरीर के रोग तो
जीवन के बाद खत्म हो जाएंगे। कहा जाता है कि मरने
के समय तो रोग भी शरीर को छोड़ जाते हैं। दुख नर्वस सिस्टम के कारण महसूस होता है।
मरते समय नर्वस सिस्टम बंद हो जाता है, इसलिए दुख महसूस
नहीं होता। मन के दुखों को दूर करना मुश्किल है। मन बड़ा चंचल है इसको कोई रोक
नहीं सकता। मन दौड़कर दूर चला जाता है। यह सोते हुए और
जागते हुए भी कहीं का कहीं चला जाता है इसको हम रोक नहीं सकते। मन एक देवता है जो
लोगों के अंदर बैठा हुआ है। इससे बड़ा कोई देवता नहीं है। मन का देवता ही मुक्ति
दे सकता है। शरीर मिट जाता है लेकिन मन नहीं मिट सकता। ज्ञान भी मन में समाया होता
है। फोटो कैप्शन:प्रवचन करते मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी।

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