शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

8 दिवसीय फर्स्ट एड ट्रेनिंग सर्टिफिकेट कोर्स मात्र 1500 की नाममात्र फीस पर उपलब्ध


रैड क्रॉस सोसायटी की ओर से 1000 से अधिक विद्यार्थियों को दी गई आपात स्थिति में जीवन बचाने की सी.पी.आर. ट्रेनिंग

होशियारपुर, 24 अक्तूबर:
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार और भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के सहयोग से 13 से 17 अक्तूबर तक सी.पी.आर. जागरूकता सप्ताह मनाया गया। इस अवसर पर रैड क्रॉस सोसायटी, होशियारपुर की ओर से भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में सी.पी.आर. की प्रायोगिक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिनमें 1000 से अधिक विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने की तकनीकें सिखाई गईं।

इस प्रशिक्षण अभियान के अंतर्गत रैड क्रॉस स्कूल ऑफ वोकेशनल लर्निंग, डिजिटल लाइब्रेरी, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नारा, अरोमा इंस्टीट्यूट और होशियारपुर ऑटोमोटिव एंड ड्राइविंग स्किल्स सेंटर में एक दिवसीय व दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित की गईं। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य छात्रों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को सी.पी.आर. जैसी आवश्यक जीवन रक्षक विधियों के प्रति जागरूक करना था।

डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने कहा कि हम सभी को सी.पी.आर. की यह आवश्यक स्किल अवश्य सीखनी चाहिए, क्योंकि यह छोटी सी जानकारी किसी की जान बचाने में मददगार हो सकती है। उन्होंने बताया कि रैड क्रॉस सोसायटी, होशियारपुर द्वारा 8 दिवसीय फर्स्ट एड ट्रेनिंग सर्टिफिकेट कोर्स मात्र 1500 की नाममात्र फीस पर उपलब्ध है। इच्छुक अभ्यर्थी https://ircsfa.org/ पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी का प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है और विदेशों में रोजगार प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए कोई भी इच्छुक व्यक्ति मोबाइल नंबर 93355-35493 पर संपर्क कर सकता है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए रैड क्रॉस सोसायटी, होशियारपुर के सचिव मंगेश सूद ने बताया कि इस जागरूकता अभियान के तहत 1000 से अधिक प्रतिभागियों को हृदयाघात, बिजली का झटका, पानी में डूबने आदि आपात स्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने और सी.पी.आर. प्रदान करने के तरीके सिखाए गए। प्रशिक्षण का संचालन फर्स्ट एड ट्रेनिंग सुपरवाइजर संजीवन सिंह के नेतृत्व में किया गया, जबकि सरबजीत (रैड क्रॉस लेखाकार) तथा दविंदर कुमार (साइंस मास्टर, सीनियर सेकेंडरी स्कूल नारा) ने भी विशेष रूप से योगदान दिया।

 

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