खोरा उपन्यास कंडी का ऐतिहासिक
दस्तावेज है: डॉ. विजय भट्टी
(उपन्यास खोरा पर हुई विचार चर्चा)
होशियारपुर :( 6 अक्तूबर 2025) यहां दृष्टि दा विजन
मंच, होशियारपुर
द्वारा सुप्रसिद्ध उपन्यासकार डॉ धर्मपाल साहिल के नव प्रकाशित पंजाबी उपन्यास
" खोरा " पर गहन विचार गोष्टी का आयोजन विद्या मंदिर स्कूल, शिमला पहाड़ी में आयोजित हुआ।प्रमुख वक्ता डॉ विजय भट्टी ने "
"खोरा" उपन्यास को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए उसका
सूक्ष्म विश्लेषण किया। उन्होंने बताया यह आंचलिक नावल कंडी क्षेत्र की भाषा,
सभ्याचार, वातावरण, रिश्तों,
भूमि, मानव मूल्यों आदि के हो रहे विघटन,
क्षरण एवं पतन पर प्रकाश डालता है।
विकास के नाम पर यहां जो विनाश और विस्थापन हुआ है उसकी यथार्थमई तस्वीर
पेश करता है।इनके अतिरिक्त कथाकार पम्मी द्विवेदी ने उपन्यास के पात्रों के चरित्र
चित्रण की आपने अनुभव के आधार पर पुष्टि की।डॉ. अरमनप्रीत ने भी सशक्त पूर्णा
पात्र को अपनी दादी मां का स्वरुप बताते हुए इसकी सर्व व्यापकता को प्रकट किया।डॉ.
भूपिंदर सिंह ने मालवा, माझा, दोआबा की
भांति कंडी के पात्रों की काव्यात्मक ढंग से जान पहचान कराई।डॉ .हरप्रीत सिंह
ने उपन्यास खोरा द्वारा चिन्हित क्षरण को
रोकने हेतु उपन्यास से प्रेरित होकर लोगों को इस पर अंकुश लगाने का आह्वाहन किया।
बाल साहित्य शिरोमणि बलजिंदर मान ने खोरा के पात्रों के मनोविज्ञान पक्ष प्रस्तुत
करते हुए इस उपन्यास पर फिल्म निर्माण द्वारा इसे जन जन तक पहुंचने की आवश्यकता
बताया।प्रिंसिपल डॉ. परविंदर सिंह ने
उपन्यास की रोचकता के साथ साथ विकास भी क्षेत्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति
अनुसार ही करने पर बल दिया।मा . कुलविंदर सिंह जंडा ने खोरा के पात्रों के आपसी
प्रगाढ़ रिश्तों को कंडी के संयुक्त परिवारों से मिले संस्कार बताया।चौधरी
इंद्रजीत ने बिरजू और बालों के पवित्र रिश्तों को समय की आवश्यकता कहा। कथाकार
राजिंदर सिंह ढ़डडा ने कंडी क्षेत्र की
संस्कृति में रिश्तों की मजबूती पर प्रकाश डाला।अमरीक सिंह दयाल ने भी मंच संचालन
करते हुए उपन्यास के कथानक और बोली के संबंध में सार्थक टिप्पणियां की । उपन्यास
खोरा के लेखक डॉ साहिल ने वक्ताओं द्वारा उठाए गए प्रश्नों के माकूल उत्तर
दिए।इनके अलावा विश्व प्रसिद्ध पंजाबी गायक गुरदीप सिंह, डी.ई.ओ अरची अग्रवाल, हंस राज
राही, डी.ई.ओ
अश्वनी कुमार दत्ता, जगजीत सिंह गनेशपुर,विजय कलसी, हरबंस कमल, मोहन
लाल कलसी, जीवन कुमार, आर.सी .मेहता
आदि ने भी इस प्रभावशाली विचारगोष्ठी में भाग लिया।

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