अमृतसर नगर निगम के मेयर और कमिश्नर दोनों से ही यह प्रश्न है कि सारा अमृतसर केवल उन चार सड़कों के अंदर सिमटा है जो पर्यटकों के लिए हैं या श्री दरबार साहिब की ओर जाती हैं। इसके अतिरिक्त सारे अमृतसर की कोई चिंता नगर निगम को नहीं। सात दर्जन से ज्यादा पार्षद जिस शहर में हों, पांच विधायक हों उस शहर में गंदगी की यह हालत है जिससे शहर के नाम पर एक बहुत बड़ा ग्रहण लगा हुआ है। अभी जो नवरात्र और विजयदशमी का त्यौहार बीता है, कम से कम बीस हजार बच्चे, स्त्री, पुरुष धार्मिक आस्था निभाने के लिए नंगे पांव चलते हैं। तब निगम को और पंजाब सरकार को यह याद नहीं आया कि सड़कें साफ होनी चाहिए, सारे रास्तों पर रोज पानी का छिड़काव हो, कूड़े के ढेर उठा लिए जाएं। मच्छरों, मक्खियों तथा आवारा जानवरों से शहर को छुटकारा दें। अब दीपावली आ रही है। दीपावली पर भी जहां लाखों पर्यटक अमृतसर आएंगे, वहीं श्री दुर्ग्याणा मंदिर एवं उसके आसपास सभी मंदिरों में जनता पूजा करने के लिए जाएगी। अफसोस है कि भीतरी शहर के पार्षद और एमएलए भी इसका ध्यान नहीं कर रहे। मेरा सांसद समेत सभी पार्षदों से यह प्रश्न है कि अमृतसर क्या उतना ही है जितना बारह दरवाजों के बाहर है या जो चार सड़कें पर्यटकों को लेकर महत्वपूर्ण हैं। सरकार को चाहिए और मेयर तथा कमिश्नर को मंदिर में आकर यह जरूर बता देना चाहिए कि अगर तो वो इन सड़कों को साफ कर सकते हैं तो ठीक है अन्यथा जनता अपना प्रबंध खुद करे। नगर निगम हाथ खड़े कर दे तो जनता काम संभालने को तैयार है।
पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री ने तो मानों यह शपथ खा ली है कि वे अमृतसर की न चिंता करेंगे, न कोई कठिनाई दूर करेंगे।
लक्ष्मीकांता चावला

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